आदित्य धर की 'धुरंधर' का दूसरा भाग यानी 'धुरंधरः द रिवेंज' अब बड़े पर्दे पर धूम मचा रही है। बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म 1600 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' ने अपनी दिलचस्प कहानी, कलाकारों और अभिनय के साथ-साथ अपने शानदार म्यूजिक के लिए भी सुर्खियां बटोरीं। दोनों ही फिल्मों का म्यूजिक शाश्वत सचदेव ने तैयार किया है, जिसे लेकर अब पिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने शाश्वत की तारीफों के पुल बांधे हैं। आदित्य धर ने बताया कि शाश्वत ने दोनों ही फिल्मों के गानों को बेहद कम समय सीमा में तैयार किया था और शाश्वत ने यह सुनिश्चित किया कि गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक (बीजीएम) फिल्म निर्माताओं के विजन को पर्दे पर उतारने में सक्षम हों।
आदित्य धर ने की शाश्वत सचदेव की तारीफ
आदित्य धर ने शाश्वत के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा "शाश्वत सचदेव को सलाम। कुछ कोलैबोरेशन काम से परे होते हैं, वे बेहद पर्सनल हो जाते हैं। शाश्वत मेरे लिए वैसे ही रहे हैं। सिर्फ धुरंधर के म्यूजिक कंपोजर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति जिन्हें मैं छोटे भाई की तरह मानता हूं, जिनके साथ मैंने उथल-पुथल, खामोशी, विचार और कुछ सबसे गहन रचनात्मक दिन साझा किए हैं। इस फिल्म में उन्होंने जो कुछ किया है, उसे कहते हुए भी मुझे यकीन नहीं होता।"
9 दिन में तैयार किए धुरंधर के 9 गाने
आदित्य धर आगे लिखते हैं- 'धुरंधर पार्ट 1 के लिए 9 दिनों में 9 गाने तैयार किए गए, और पूरा बैकग्राउंड म्यूजिक मात्र 6 दिनों में तैयार किया गया। फिर धुरंधर पार्ट 2 के लिए 11 दिनों में 14 गाने तैयार किए और बैकग्राउंड म्यूजिक 3 दिनों में। इतनी तेजी से, इतने बड़े पैमाने पर, इतनी भावनात्मक गहराई और इतनी असाधारण गुणवत्ता के साथ, यह वाकई अविश्वसनीय है। और जो बात इसे और भी अवास्तविक बनाती है, वह यह है कि 3 महीनों के भीतर रिलीज हुए दोनों एल्बम ग्लोबल चार्ट्स में टॉप पर पहुंच गए, लगभग हर गाने को खूब सराहा गया, जो कि दुनिया की किसी भी फिल्म के लिए एक दुर्लभ घटना है।'
घर में चलता रहा काम- आदित्य धर
आदित् धर ने आगे बताया कि कैसे करीब 15 दिनों के लिए उनका घर भी ऑफिस में तब्दील हो गया था। वह लिखते हैं- 'लगभग 15 दिनों के लिए मेरा घर, घर नहीं रहा। यह एक लिविंग स्टूडियो बन गया। हर कमरे में कुछ न कुछ काम चल रहा था, लिविंग रूम में संगीत, बेडरूम में रिकॉर्डिंग और बालकनियों में लेखन। सिंगर और म्यूजिक कंपोजर्स लगातार आते-जाते रहते थे। दिन और रात एक-दूसरे में घुलमिल जाते थे। 21-22 घंटे लगातार काम, समय का कोई एहसास नहीं, बस सब कुछ सही करने की एक साझा दीवानगी। और इन सबके केंद्र में थे शा (शाश्वत सचदेव)। सब कुछ संभाले हुए। क्रिएटिंग, कंपोजिंग, गाइडिंग, प्रतिक्रिया, विकास, सब कुछ एक साथ। कई दिन ऐसे भी थे जब वह अस्वस्थ थे, बहुत कम नींद लेते थे, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझते थे, लेकिन फिर भी पूरी तरह से मौजूद रहते थे, बिना किसी समझौते के, बिना धीमे पड़े। इस तरह का लचीलापन दुर्लभ है।'
इरशाद कामिल की भी की तारीफ
अपने पोस्ट में आदित्य धर ने इरशाद कामिल की भी तारीफ की। वह आगे लिखते हैं- 'लीजेंड्री इरशाद कामिल सर की मौजूदगी और एक ऐसी टीम का साथ, जिसने अपना सब कुछ झोंक दिया। उन्होंने इसे और भी खास बना दिया। इस फिल्म की मेकिंग के दौरान हर कोई पूरी तरह से जोश में डूब गया। और उस सारी उथल-पुथल के बीच, मैजिक (शा की साथी) एक सहारा बनी रहीं, सब कुछ संभाले रखा, उस समय ऊर्जा को थामे रखा जब सब कुछ आसानी से बिखर सकता था। शा को जो चीज सच में खास बनाती है, वह सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं है। यह उनकी लगन है। उनका कभी संतुष्ट न होने का जज्बा। उनका तब तक खोजते रहने का स्वभाव जब तक कि कुछ सच्चा न लगे। वह आसान रास्ते के पीछे नहीं भागते, वह हर सुर में सच्चाई की तलाश करते हैं। इस तरह की प्रतिबद्धता सिर्फ हुनर से नहीं आती। यह प्रेम से आती है। संगीत के माध्यम से ईश्वर को पाने का प्रेम। और आप उस प्रेम को धुरंधर के हर पल में महसूस कर सकते हैं। हमेशा आभारी। हमेशा आपके साथ।'